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मैथिली कथा -“ओ एक महिना”

सजिलो पोस्ट सजिलो पोस्ट
कार्तिक १३, २०८१, ९:२५ मध्यान्ह
मैथिली कथा -“ओ एक महिना”

हमर समझ स बाहर छल। इह सब कि भरहल छै ? एना किया एकब्याग पिन्सिपल बरैस परल छथिन हमरा उपर ?हम एकदम चुप भगेल छलौ।सबदिनमा चालि आँखि आइयो निचे झुकल आर ठोर पर मुस्की पसरल छल ।मुदा भाव फरक जेना सुर्यदय आ सुर्यस्त ।आइ उपर कहु तकाने जाय कहि अपनाके बान्हिक रखने छलौ।डर लगैय छल कहु प्रिन्सिपलके ईह मुद्रामे देखि हम अपन चेतन नहि हेराली।भित्र कुहकब शुरु भैयो गेला पर बाहर केउ बुझे नहि कही निरन्तर ठोर पर मुस्की फैलारहल छलौ।नहि जानि आई हमरा कुन ग्रह नक्षत्र घेरने छल ?नहि जानि राहु केतुके कि मनशाय छलै ? जिनका हमर आँखि हरदम झुकेने रहब स कुनो शिकायत नहि छलनि से आइ फटकारैत कहैत छथि ` सुविज्ञा म्याम उपर हमरा दिस ताकु।´ हम हुनकर मासुम रुप स परिचित छलौ। मासुम रुपजे चण्डी रुप धारण कलेने छलै ताहि रुप दिस ताकहुमे असमर्थ भगेलाके कारण हम अपन आँखि निचे झुकेने रहिगेलौ।

बैठक खत्म होइते हम सबकिछु ओतही बिसरके प्रयास करैत घरके लेल चलिदति छी।हमर मोनदिमाग इह खोजमे व्यस्त भगेल छल जे आखिर इह सब कि भरहल छै ? ओ दिन अखनो हमरा आगुमे नाचिरहल छल जैमे बीच बैठकमे प्रिन्सिपल कहने रहैथि ,` ककरो पर विश्वास करब आर करिते रहि जायब बहुत बडका बात छै । रियली आइ एप्रीसिएट यु म्याम।´जे अतेक दिनक जिन्गीमे पहिल बेर हुनके मुह स सुनि पायल छलौ ।सबठाम अपना दिस स सय प्रतिशत काज दैतोमे कान कहियो नहि एहन लाइन सुनि पायल छल। अखनो ओ घरी याद अबैत अछि त मोन बारिसमे पंख फैला नाचैत मोर जा नाचि उठैय।जिन्गीक एक अनमोल पल छल ओ हमरालेल। ताय हेतै प्रिन्सिपलक उन्टासिधा किछु बजनाइ हमरा तखनेके तखने बिसरागेल छल। कहपरलै जे तराजुके पहिलका पल्ला अतेक नै भारी छलै जे अकर भार ओकरा कनियो नहि उठा सकलै।एकठाम रहला पर अहिना होइत छै से कहि हम सब बिसैर परात भने काज पर पँहुचति छी।

भाग्यमे लिखल कहियै कि राहुकेतुके दोष ! हमरे सोचला स बात रुकबाला नहि भेलै । ओ घरीक सामना कर परल जे हम सपनहुमे नहि सोचने छलौह। नसीबके सायद ईयाह मंजुर कही। बिना किछु प्रतिक्रियाके हम भाग्यके साथ चलिदति छी।अतेक दिनक जिवनके अनुभव हमरा ईह सिखादेने छल जे होनीके हमर केतबो प्रयास रोकि नहि सकैत छै।

घर त चलि अबैतछी मुदा पूरा बौक बन्हि गेल छलौ। ककरा कि कहबै ? झुठ बाज जन‌ैत नहि छलौ आउर सच बाजि नहि सकैत छलौ। इह छल जे कतौ नहि कतौ फेउर जुडि जेबे करबै। लेकिन जाब‌ैत नहि ताबैत तकि कोनाक अपनाके नुकाक रखबै जे घरमे ककरो पत्ता नहि चलै।थैक्स गड जे हमर आसनबासन निचका फलोरमे छल आर सभगोटे उपर रहैत छलखिन। हम अपन रुममे जे ड्युटीबाला टाइममे पैसैत छलौ त बाहर निकलब त दुर खोकियो अचानक होइत छल त मुहके दाबिलति छलौ। अपने घरमे नुकाक रहैत छलौ।केहन विडम्बना छल ! केहन केहन नहि सुनल नहि देखल परिस्थितिके भोग परिरहल छल। अपने घरमे अपना स नुकाक रहु।

कहबी छै जे सत्यके अँहा कतेक दिन छुपाक राखि सकबै ! आनदिन कहियो निचा नहि उतरबाला ओ सभ काय दिन कुनो नहि कुनो काजे हमरा रुममे पँहुच जाति छलखिन।
` कि भेलौ ? अखन तकि अतै छिही ?´
जबाब रहे त नहि जबाब दी। सत्य त हुनका सभके कहियो त नहि सकैत छलियै। हमरो स बेसी ओ सभ परेशान भजैतथिन। मुस्किल त सेहो छोट नहिए छलै । घर स बाहर सब हमरे उपर जे छलै। कहियोकाल होइत छल जे कहिक भित्तर दबल सब नोर बहाली। मुदा फेउर मोनके सम्हारि लति छलौ ईह सोचि जे ईहो समस्या दुर हेबे करतै ।जाबेधरि अटकल छै ताबेधरि अपनाके हमरा सम्हारिक राखहिके अछि।
छाती त तीन टुकरी तखन भजाइय जखन देखैछियै जे हमर एच ओ डी परात भने अबिते हमरा ग्रुपमे स रिमुवड कय दैछथि।नोर निछोधाह आँखि स बह लागल।मोबाइल बन्द कइयो देला पर आँखि बिसैर नहि रहल छल।भितरे भितरे कानके चलतै लगैत छल सांस रुकिगेल होय।भर्चुअली सब किछु जेना खत्म। मुदा मोन कखनो ईह बात स्वीकारलाय तैयार नहि। नोरक वेग जोर भजाति छल सोचि जे कोनाक अबिते कायल गेलैन्ह हुनका ? लाग लागल जेना दुनियाँ झुठ छै।सबकिछु कण्डिशनल छै।किछु नहि शाश्वत अत! सबकिछु देखाबटी !

दोसर मोन कहैय नहि ओ ओहन नहि छथिन।पक्के हुनकर हाथ थरथरायल हेतैन।आँगुर काँप लागल हेतनि ।आँखि डबडबागेल हेतैन।चाहियो क किछु नहि कय सकल हेथिन। अपन नोकरीयो त देखके छलनि। पहिने अपने तब दुनियाँ जहान । ईयाह त होइत छै। किया किनको हम किछु कहियै ? भाग्य त हमर अपने खराब अछि। कनिको निक रह‌ैत त ईह दिन देखही परैत ?

अपना जनते जबलाय चारुभर प्रयास कर लगलौ। कतौ अपना जोग भेकेन्सी नहि देखरहल छल। अनलाइन जब खोजमे आँखि थाकिजाति छल। आब कुनो भेकेन्सी एलै कि कही बेर बेर मोबाइलके छुब पँहुचजाति छलौ। मुदा कखनो आँखिक चमक नहि बढै छल। रहि रहिक प्रिन्सिपलके कहल बात याद परिजाइत छल जे, ´ सुविज्ञा म्याम यु हेव डन अलोट फर अस। बट ———-´
आँखिमे नोर डबडबा जाति छल।भितरे पिब असफल भजाइत छलौ। धार बनि गालके भिजब लगैत छल।अपन नोरके अपने स पोछिलति छलहु। कुनो दुख बडका नहि लगैत छै जखन नोर पोछबाला दोसरके हाथ रहैत छै। छोटो दुख विशाल बनि जाति छै जखन अपन नोर अपने हाथके पोछ परैत छै। अपन दुख कनि कम करलाय हम प्रिन्सिपलके मेसेज कर‌ैत छी, ` नमस्ते ! अपने कहलो जे सुविज्ञा म्याम अँहा हमरा सबलेल बड केलौ । ताहिके लेल हृदय स धन्यवाद ! मुदा हमरा सँग आई ———–।´प्रिन्सिपल जाहि आदमी सँग पहिने हमरा अपन किछु कनेक्सन तेहन नहि लगैत छल आइकाल्हि हृदयमे आबि बैँस गेल छलैथ।टाइम कुटाइम हुनकर याद चलि अबैत छल जेना केहन गहिर लगाब हुनका सँग रहल होय।मोन हुनकामे ओझरायल रहलागल छल। पलपल हुनकर याद आबि हमरा कनब लगैत छल। पत्ता नहि किया हुनका पर पित नहि उठ‌ैत छल।हरदम लगैत छल जेना हम हुनकालेल बैचैन छी ओहो हमरा लेल पक्के हेथिन।जेना हमरा हुनकालेल कुहेसा फाटिरहल अछि हुनको अवश्य फाटैत हेतैन हमरा लेल।अत हमर आँखि डबडबायल अछि त ओत हुनकरो आँखि बहिरहल हेतनि।

नहि जानि किया ? किछु नहि किछु उठापटक हमर जीवनमे लागले रहैत छै।कहैत छै भगवान कपार लिख काल किछु खाली जगह छोरिदति छथिन जत आदमी अपन अनुसार ओहिमे लिखैत चलिजाइत छै मुदा हमर लिखकालमे कनियो खाली नहि छोरलखिन । सब अपने स भरि देलखिन। कपारमे जे लिखल छै से त हेबे करतै ने। ज्योतिषबाबू सभके कहल मंगल रेखा कुन जंगलमे चलि गेल छल से नहि जानि। कायदिन स सउसे भटकि रहल छी। कहाँ भगवान हाथ पकरि तानि रहल छथि त हमरा ?

मोन बैचैन भजाइय। एना रहलै त कोना कि करबै? हमर शब्दकोषमे फेउर माँगब अक्षर जे सेहो नहि छल। कोनाक घरपरिवार चलतै ? कत जाउ खोज ? दुर पैयर नहि ससरै छल । जाय त परबे करतै कतौ ने कतौ ? लग चाहे दुर । कतौ जाय स पहिने प्रिन्सिपल के याद चलि अबैत छल। अचम्मित त हम खुद अपना स छलौ जे अतेक किछु भगेलाक बाबजुदो हुनका प्रति हमर आदर घटक बदला बढिए रहल छल। जेना लगैछल किछु कनेक्सन जुडल होय। मोनमे बेर बेर एकही बात अबैत छल प्रिन्सिपल ओहन नहि छथिन। ईह कालखण्ड कहि या परिस्थितिक दोष छै। हमर भावुक मोन प्रिन्सिपल के फेउर मेसेज करैत अछि, ` नमस्ते !
भोर जागकाल सबदिन एक आशलय उठैत छी
राति सुतकाल सबदिन गेरुवा भिजबति सुतैत छी
भगवान अपनेके सदा खुशी रखैत।
आइ एम वेटिगं फर योर ——- ´

बड असहज परिस्थिति बनिगेल छल।एहन कुनो दिन नहि छल जाहि दिन हम अपन तैयार कायल बच्चाके लेल उदास नहि होति हायब ! ओहिठमनक किछु स्टाफ सब सेहो याद अबैत त छलथि मुदा जखन किछु बच्चा आर एच ओ डीके याद अबैत छल त अपनाके रोकि नहि पाबैत छलौ। निछोदाह नोर बहलगैत छल। आईकाल्हि हम बहुत हैरान छलौ देखिक अपना जे एच ओ डी सँग बितल बस हृदयस्पर्शी बात मात्रे याद आबिरहल छल।ईह नहि छल जे दुनु गोटेबीच झंजमंज नहि भेल होय ? ओना त एकदिनके सिवाय आहितकि हमर भरि मुह बातो नहि भेल छल हुनका सँग ।मुदा दुनुगोटे दुनुगोटाके आँखि स बहुत किछु कहि जाइत छलियै। हुनका स दुरी हमरा अखरि रहल छल। नयन बरैस उठैत छल हुनकर नयनके दर्शनलाय।
हम खुद अपना स बहुत बेर अकर उत्तर जानके प्रयास केलौ जे हमरा ईह कि भरहल अछि ? हमर जान अत रहितो परान किया हमर सँग नहि ? ओ किया उम्हर हुनका सभलग जाक अटकल ? मुदा असफल रहैत छलौ। कुनो जबाब नहि भेटैत छल।

लगैत छल हम सभलेल अतेक तडैप रहल छी । के जनैय उम्हर सभके अहि बातक सुधियो तकि हेतै कि नहि ? ओहिदिन जाक पत्ता चलल जे जेतबै व्याकुल हम अपन बच्चा सभलेल छी तेतबे अोहो सब हमरालेल अछि। हमरा बच्चासभ समुहेमे फोन करैत अछि, ` म्याम अँहा कत छी ?हमरा सभके अँहा चाहिँ ! प्लीज प्लीज म्याम हमरा सभलेल प्लीज म्याम आबिजाउ म्याम ।वी नीड यु म्याम। कम ब्याक प्लीज म्याम ! ´
` हम तोरे सभ सँग छी। कहाँ तोरा सभ स दुर भसक‌ैत छी ? ´ अहि स आगु हमरा किछु नहि बाजल होइय।
` त आउन हमरा सब लग। वी मिस यु अ लोट म्याम। हमर सभके जरुरत छी अँहा।´

मोनके एकटा बडका सकुन मिलैत अछि।हमर आँखि स निरन्तर दु घण्टा तक नोर बहैत रहिजाति अछि। ईहो प्रकृतके बुझब बहुत अजीब छै ! आइ नोर बहाबमे सेहो बड आनन्द आबिरहल छल।

अहि बीचमे मोबाइलमे टुनुक बजैत सुनाइय। देखैछी त एच ओ डी कुनो नम्बर सेन्ड केने छलखिन ह्वाइट्सएप पर।ईह ककर नम्बर छकि ? कैला हमरा मेसेज केलखिन सोचिते छलौ कि डिलिट कय दतिछथिन।हमरा बुझमे आबिजाइय जे दिमागमे हम रहलाके कारण एना भगेलहेतैन।सचमे मोनके एक बड नीक तृप्ति भेटैय।जे सबके अपना सिकायत छल से सब दुर भरहल छल।

आब त कतौ कोनामे जे हमरा अपन आत्मसम्मान खियारै छल ओ सदैब सदैबके लेल दबकि गेल लाग लागल छल। सभसँग जुडल सिनेह पैघ लागिरहल छल। मोनमे एक आवाज आबि गाबलगैय ` जगतमे सब स बढि सिनेह ।सिनेहके परितर केय करत आन ? ´ ताय हेतै ! धिरे धिरे जे छल , किछु समयके कारण आर किछु ईह बात सबके चलतै बहुत हद तक पीडा कम भगेल सन लगैत छल।सायद खुशी , खुशीके तनैत होइ। याद आबिजाइय ओ घरी जखन डिरेक्टर खुशी भय हमर पिठ थपथपोने रहैत। हर्शक सिमा नहि रहिगेल रहे।लागल रहे जेना ट्रफी पाबिरहल होइ।

आइ कनि अपन एरिया स दुर नोकरीके लेल इंटरभिउ छल।पेट पोसके छल |
घर चलबके छल ताय किछु दुर रहितो बन्हिया काज देखि हम पँहुचैत छी। गेटमे स भित्तर पैस पैर नहि मानि रहल छल।रहि रहिक अपन पहिलुका काजक स्थान याद आबिरहल छल।होइत छल अखनो जँ बजालेता हमरा त हम दौगक चलिएबै।हमही जनैत छी कतेक भारी परिगेल छल हमरा भित्तर पैसनाइ।सबकिछु बन्हिया भेल छल।हमरा एप्वाइंटमेन्ट लेटर भेट जाति अछि।काल्हि स आबलाय कहैत अछि।जहिलाय भटकिरहल छलौ ओकर थोर त लागिगेल छल मुदा मोनमस्तिकमे अखनो पुरनके ठाम बैसल छल।नहि ओ हटि रहल छल नहि हमही सच कही त हटाब चाहि रहल छलौ।

जीवनक अहि घरी तकि कतौ आन ठाम काज नहि केने छलौ से नहि छलै।मुदा हमरा अपने नहि पत्ता चलल छल कोनाक एनाक सब सँग हम एहि रुपे जुरिगेल अत छलौ जे अत स छुटब सोचिएक मोन कापि उठ‌ैत छल।ओहि बच्चा सभके मनुष बनबैत बनब‌ैत अपनहु कखन कहाँ मनुष बनिगेल छलौ पत्ते नहि चलल छल।आइ तकि हम पेशागत सबितरि रहैत छलौ मुदा हम अत तनमन दुनु स समर्पित भगेल छलौ।लगैछल जेना सभ हमर अपन अछि। ओकरा सभके कनियो कष्ट देखि हम तरैप उठैत छलौ।ओकरा सभके हर्षित देखि हमहु चहैक उठैत छलौ।

जेना बच्चा सँग लगाब जुरल छल तहिना एच ओ डी सँग सेहो। हुनको बहुत योगदान हमरा उपर छलनि , कहपरलै ।हमरा सनके पाँथरके मोन पिघलाब सिखा देलखिन । बहुत असर संगतके प्रभाव सेहो छलै।हुनकर संगतके कारण हमहु निखरैत चलिगेल छलौ।बड नीक लाग लागल छल जिन्गी।चारुदिस सिनेहे सिनेह पसरल देखाइत छल।सायद इयाह स्वर्ग छै ! लगैत रहैत छल जेना स्वर्गेमे छी।

लगिते नहि छल ईह हमर काज करबाला स्थल अछि।अपन घरे सन लगैत छल।एकदिनक छुट्टी सेहो आब नीक लगनाइ छोरिदेने छल। सिनेहक जादुके शक्ति अपार होइत छै बुझमे आबिगेल छल।कहियो किया काजक थकान महसुस हायत ? हम त मोनो खराबमे चलि अबैत छलियै किया कि हमरा पत्ता छल हमर दबाइक पुरिया अतौ अछि।

तैयार होइत छी काज पर जायलेल।पत्ता नहि किया अखनो पुरनका स्थल पर मोनदिमाग अटकल छल।मोनमे अबैय जे जाय स पहिने एकबेर प्रिन्सिपलके फोन कलितौ।फेर सोचाइय ओ थोरही उठेथिन। उठबथुन चाहे नहि उठबथुन एक बेर करमे हमर कि जाइय ? हम फोन डायल त कदति छियै मुदा थोरही उठतै से दिमागमे चलिरहल छल ताय फोन पर पुरा दिमाग नहि छल।
उम्हर स हेलो सुनि हमर खुशीक सिमा नहि रहिजाइय।मिझायल दीप जेना लगैय अक्सिजन पाबि बरलागल होइ।
हम कहैत छियै ` नमस्ते ! केना छी अपने ?´
` हम नीक सँ छी। अँहा ?´
हमर आँखिमे नोर भरिजाइय अहि तरह सँ रेस्पोन्स देखि। कि छलै आब ? जेना हमर भावुक मनके बाट भेटगेल होय।
` हम कि ठीक रहब ? काजो भेटल त दुर।हम अखनो अपनेके वेट कय रहल छी।´, कहैत छियै।

` ठीक छै हमरा दु दिनक समय दिय।´, कहैत छथिन।
हमर खुशीक पंख लागि जाइय।केय जायत आब ओहिठाम नोकरी कर । हम कपडा बदलि घरक कपडा पहिरलति छी।जहाँ तकि हम अपन प्रिन्सिपलके जनैत छलियै अकर मतलब सय प्रतिशत हँ त छेबेकेलै सँगे दु दिनक समय कहलेल मात्रे छलै।हमरा पुरा विश्वास छल काल्हिए बजेथिन।स्याह भेलै काल्हिए बजेलखिन आ हमरा हमर सिनेह फेउर भेटगेल छल।
लागिरहल छल देल सिनेह सचमे बढिक लौट अबैतछै।
हमर दीप अपना सँग लगैछल हजार आउर सखी आमंत्रण कलेने होय।चँहुदिस रोशनीए रोशनी फैलल लागलागल छल।हम सरोवरके कमल जा फुलिउठल छलौ।कंचन मोन कोमल बनि बहिरहल छल।आँखि तरहथीक मंगल रेखा पर जा अटकी जाइय। मोन कहलगैय ठीके ज्योतिष कहैत छथिन जकरा हाथमे मंगल रेखा रहैत छै ओकर पाछु भगवान ठार रहैत छथिन।ओकरा भगवान गिर नहि दति छथिन।कहु ओ गिरियो परैत छै त जतेक निचा खसल रहैतछै ओतेक उपर फेउर ओकरा भगवान उठादति छथिन।

हम दुनु हाथ जोरि अपन भगवानके गोर लाग लगैतछी। मोनेमोन अन्गिन्त आभार प्रकट करैछियैन ।आइ एक अजीब विश्वास भित्तर कय गेल छल। लगैत छल हम आउर मजबुत बन्हिगेल होइ। शिष झुका भगवानके नमन करकाल अपन नोर अपने हाथे पोछमे अपनाके अपना उपर गौरव महशुस भरहल छल।

लेखक – सुधा झा

महोत्तरी 

हाल – काठमाडौ 

Tags: लेख/रचना

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