हम डोमेस्टिक उडानके लेल धडफराति एयरपोर्ट पँहुचति छी त पत्ता चलैय जे किछु टेक्निकल प्रोब्लेमके कारण डिलेय भगेल छै। अहि समयमे कि करु किछु नहि फुरा रहल छल ? ओहिठमनक एक स्टाफ स बतिया हम इन्टरनेशनल उडान दिस टहैल दति छी।
भिडभाड स भरल इ क्षेत्रके हम देखिते रहि जाइत छी।सब रंगक आदमी माने बच्चा ,जवान ,बुढ ,जन्मल आर जन्मलके लेल आतुर रहल सबरंगक पिढीके दर्शन एकही ठाम भजाति अछि।किछुके हाथमे बडका बडका अटैछी छलै।सायद मोनक अरमान सेहो तहिना बडका छलै जे ओत जाअ , देल काज कय , टाका कमा आबि मनोरथ पूरा कहि या भोगिरहल दुखके सुखमे बदलबाके अछि।
हम एकएक कय सबके मुह निहारि रहल छलौ।जाअ रहल छलै सभ विदेश मुदा ताहिक उत्साह हमरा चस्मे लगाक ताक परल।बहुतके मुह पर उदासी छलै त बहुतके आँखि स गंगाजमुना बहिरहल छलै।नहि जानि ईह एयरपोर्टक भुमि पुर्व जनममे कि कय आयल छलै जे सभके नोर स लगैछलै कहु दहा नहि जाइ । हमरा स रहल नहि गेल।दृश्य दुर स अवलोकन केनाइ छोडि हम सत्यतथ्य बुझ समीप पँहुचति छी।
देखैछी एक बारिए बरिसक सुकुमारिके काजर लागल आँखिक नोर स गोर गाल मलिन बनि गेल छलै।बुझमे हमरा देर नहि लागल जे दुनुके पहिल होरी सेहो नहि सँगे बितल छै।एकदोसरके हाथ कसि कय पकरि हिचकि रहल छलै। दुनु दुनु दिस ताकि अपनाके अपने बुझबति बहैत नोरके पोछिलति छलै। रहि रहिक एकदोसरके एनाक पजियाब पँहुचति छलै जेना नहि जानि आगु कि हायत? ईह वियोग मिलनमे परिनत हेबो करत कि नहि ?
`भरला बयसमे एक दोसर स दुर भयरहल छी।किया नहि बुझै छथिन ? हमरा नहि सोनाचानी नहि सिफनेके सारी चाहिँ।हुनकर बाहिक माला हमरालेल हीरामोती स बढिक अछि। केहनो नुवा पहिर अपनाके हुनकर आँखिक एनामे देख पबैत छी त लगैय जेना सारीके किनारीमे मणिके कढाइ सजिगेल होय।मानैछी ओ काल्हि बहुत टाका लक अओता त कि ओ टाका हमर अहि वियोगक पलके किछुवो भर्पाइ कय सकैय? इयाह त बेर होइत छै जखन नव विवाहिता सँग बितबैत छै ।एक दोसरमे मगन रहैत छै । कहबीयो छै जे
साँझ बितिए गेल कि लेसब दीया ?
बयस बितिए गेल कि करब पिया ?
किया हमर कुहकब हुनका नहि सुनाइ दरहल छनि? हुनका गेलाके बाद अहि ठटरीमे परान रहि पेतै ? हम कोना किछु कय पेबै ? अतेक बडका वियोग कोनाक सहि पेबै ? सचमे पुरुषक हृदय बड कठोर होइत छै । इयाह त फरक छै हमर आर हुनकर प्रेममे । हुनका दुनियाँदारीक बीच हमरा प्रति प्रेम कखनो देखाइ परैत छनि त हमरा सब स पहिने ओ देखाइ परैत छथि तकर बादे किछु दुनियाँदारी।´
एकटाके लगैत छलै जे प्रीतम घुरि एबो करता कि नहि ? त दोसरके लगैत छलै फेउर अपन गृह लौट पायब कि नहि ?मोनमे एहन त्रास रहितोमे एकटा भगजोगनीक इजोत कतौ चम्कि रहल छलै जे आयब त जरुर चानक चाँदनी लक आयब। अगुवार पछुवार सब इजोर भजायत।
हमहु अछुत कहाँ रहि पायल छलौ ? अपन आँखिक नोरके नुकबति दोसर दिस ताक लगैत छी। देखैत छियै एकटा नव जवानके एक हाथ एकटा बच्चिया आर दोसर हाथ एकटा बच्चबा पकरि मुह सुठुवने बैसल छलै। कातमे कनि बयस लागल स्त्रीपुरुष बैसल छलखिन जे एकटकरे अपन तीनु बच्चाके कुहकति करेज सँग देख रहल छलखिन।जेना लगैछलनि नहि जानि फेउर कहिया अहि तिनुके एना सँगे देख पायब ?
बच्चियाके हाथ भैयाके हाथ कसिक पकरने छलै त आँखिमे बहुत रास प्रश्न घुमि रहल छलै जे ` आब हम कोना अहि हाथमे राखी बान्हि पायब ? भरदुतियामे हमर भैयाके चानन ठोप के कयदेतैन ? ललाट सुने रहिजेतैन । कोनाक हम नत लति कहबै जाबे गंगाजमुनामे पानि बहे ताबे धरि हमर भैया जिबे। ककरा हम फुसिएके तंग करैत कहबै एतबे स हम नहि मान बाली छी ! हमरा आउर चाहिँ ।किछुदेरके बाद जाक सब फेउर भैयेके जेबीमे धय देबै।अपन मुहके ओढनीके कोर स दबैत पयरक अौठाके देख लगैत छै ।
बच्चबाके आँखिमे गाछीक दृश्य घुमिरहल छलै।ककरा सँग आब क्रिकेट खेलायब ? केय हमरा ब्याटिङ कर सिखायत? केय आब बाबुक डाट स बचायत? केय हमरा बिसरल होमवर्क करबायत? नोरायल आँखि स भैयाके मुह ताक लगैत छै । भैया अपन दुनु भायबहिनके नोर पोछैत भरि पाँज पजिया लति छै।
ओहि भैयाके आँखिमे नोर भरल छलै जे जत अनदेखल ठाम जारहल छी ओत कोनाक कि करब? हम कोनाक रहब? केय हमरा बुझत ? काज पर स लौटब त केय छिपली लक दौरत ? कहत पहिने खाले भुख लागल हेतौ ? देख तोहर पसिनक चिज तोरालाय उबारिक रखने छियौ । माय दिस तकैत छै ।मायके सेहो अहि वियोगमे डुबल देखैत छै। माय सोचिरहल छलखिन ईह सुकुमार बेटा हमर , जकरा हिरलामे डोलाक पाललौ से ओहि खाडी देशक प्रचण्ड गरमीमे नहि जानि कोना खटत ? पियासो लगैत त पानि देनहार के रहतै ? बाबू सभके देखि अपन दर्द बाहर नहि कय भितरे पिब उदास मन स सभ दिस ताकि रहल छलखिन।
हम अपनाके ओहिठाम आउर बेसिदेर अटकाबमे असमर्थ भजाति छी।आगु बढैत छी त देखैत छी एक जनानी जिनका देखला स लगैत छलै मास पुरलागल होइ। अपन पेटके ओढनी स झपने अस्तव्यस्त भय बैसल छलखिन।एहन समयमे नारीके कष्ट रहितो मुहपर फुलल कमलके भाव रहैत छै फैलल।मुदा हुनकर मुहक कमलक भाव मुरझायल सन लगैत छलै । सँगही बैसल हुनकर वर रहि रहिक हुनकर पेटके छुवि रहल छलखिन।ओहिना लागि रहल छलै ओ अपन खुनके स्पर्श कयरहल हेथिन।
`जनम कायल अकर हम नहि रहब।छठियारक प्रशन्ता कि होइत छै ? ओहो हमर भाग्यमे नहि ! ओकर पहिल कानब सेहो नहि सुनि पायब।ओकर बचपन बाप रहितो बिन बापके बिततै। जनैछी हम , हम ओकरे सभलेल जारहल छी। नहि जनैछी हम कतेक सही छी कतेक गलत ?आबबला दिन हमरा कि ठहरायत ? ´, अपन दुनु आँखिके हाथ स झापि लति छथिन । गर्भवती हुनकर , हुनकर कान्ह पर माथ धय सिसक लगैत छनि।
ओ आदमी अपनालेल कतहु स्थान नहि पाबिरहल छलखिन ।
`नहि जाइछी त कोनाक अहि बच्चा आउर परिवारके नीक भविष्य देब ?जाइछी त कि हमरा लेल इह उचित छकि एहन समयमे छोरिक जेनाइ ? अहि समयमे सब स बेसी हुनका हमर जरुरत परतनि । एहन जानमे कोनाक असगर ओ कि करथिन ? जनैछीयै मायबाबु पूरा धयान रखथिन। तैयो हमर होनाइ दोसरे बात रहितै।´ सोचि अपन मुह आकाश दिस घुमा लति छथिन ।
हमर धैर्यके बान्ह लगैत छल टुटिगेल होय।हाथक रुमाल पुर तरहे भिज गेल छल। जीवनमे केहन केहन मजबुरी केहन केहन बाध्यता होइत छै ताहि स हुबहु हम
भयरहल छलौ। कतेक पीडा छै अहिठाम ? अपनाके सम्हारैत हम ओहिठमन स आगु बढैत छी।
किछुए डेग बढने हेब कि फेउर डेग रुकि जाइत अछि। सत्तरके आगुपाछु रहल वृद्ध जोरीके हाथक बेत लडखराति देखैत छियै। कनिदेर त हमरा समझमे नहि अबैत अछि जे बैसलमे हिनकर बेत किया एना लडखरा रहल छनि ? जखन हुनका दिस तकैत छी त लगैय जेना हमरा बिना तरंगेके धरती डोलि गेल होय। हम नहि चाहितो सहारा बेजान चिजके लेब पँहुच जाइत छी।ओ वृद्ध माय बेटाके कब्जा कसिक पकरने छलखिन।जेना केउ हुनका स हुनकर बेटाके झपटि रहल होइन।
` हमरा किछु नहि चाहिँ ? तु नहि जो।जाय अछि ओहिमे गुजारा कयलेब।आब फेउर अहि बुढारीमे किया तेजगर आँखि चाहिँ ? देख हम सब किछु देखरहल छी।ओत चिलगरी लागल छै।आकाश आसमानी रंगक छै।कतौ कतौ उजर उजर बादल घुमिरहल छै। देख देख तोहर बाबुजी कथि रंगक कुर्ता पहिरने छथुन।तु काल्हि जाहि सर्टमे बटम लगादेने रहियौ से पहिरने छाय ।अहि स बेसी हमरा आउर किछु देखहुके नहि अछि ।´कहि बहैत नोर केउ देखे नहि से कहि मुरी झुकालति छथिन।
बेटा मायके नोर पोछैत छातीमे सट्टा लति छै। मनेमन कहैत छै ,` तोरा कोना कहियौ माय ? डाक्टर साहेब कहलखिन जे अगर छ महिना स लक बरिष दिनके भित्तर हिनकर आँखिक अपरेसन नहि करेबनि त आँखि काज केनाइ छोरिदेतैन। अहिठाम कुनो आयउपाय नहि देखायल।बापदादाके देल सम्पत्ति मन होइत छल हटादि। देखलौ जे हटेला स समस्याके समाधान नहि भयरहल।फेउर ओहो बात हम नहि बिसरल छी तोहर कहब जे आब एतबे रहिगेल छौ रे वउवा ।अकरा सम्हारिक रखिहे। बेर मौका आउर अखन तकि त जेना तेना इहे सम्हारति आयल छै।बेसी रहितै त हटाइयो दितियै।तोहर अपरेसन स बढि किछु नहि छै। मुदा ओ कनिमनि हटेला स —–?´
जेना लगैछै माय मनेमन कहल बात सुनि लेने हेथिन।
`हम कनि धुंधियाले देखब ।कनि कमे देखब। कि भजेतै ? हमर आँखि त तु छे। नहि जो।´ , बाजि उठैत छथिन।
` माय चुप भजो।कनिए दिनक त बात छै ? हम जल्दीए चलि एबौ। होरीमे तोहर हाथक मालपुवा खुवाब फेउर छौरा सभके लक अँगनामे रहबौ।दिन त फटाफट बीत जाइत छै ने ? फेउर तोरा सिखा देने छियौने । जखन मोन हेतौ भिडियो कल करि हे। हमरा स बतियै हे। मायबेटा बैसक बतियाब। तु अहिठमनक सबटा बात सुनबी हे। बाबुजी कत कत चुपे बिदा भजाइत छथुन से सबटा एकएक कय क हमरा कहि हे। छोटकी काकीके अनढनकँक बात कहि हँसबी हे । ´मायबेटाके बात सुनि बाबू यम्हर अपन बहैत नोर स गमछाके भिजारहल छलखिन।
`देखियौ त वउवा केहन केहन पछुवायल देश सब कत कय पँहुच गेलै ? कतेक उन्नति प्रगति कय गेलै ? इ आउर पाछु मुहे घुसकल जारहल छै। कनियो फिकिर छै अकरा अपन जनताके ? खाली अतके शासकके अपना मोटाय पर सुरता छै । ज देशक नेताके नियत सोझ रहितै त जनताके एहन दिनक सामना कर परितै ? ´,हमरा दिस तकैत बजैछथिन।
हम बस हुनकर कहल बात सुनैत रहि जाइत छी।कि कहितियनि ? कुनो शब्द रहैत त नहि। गराबटुक लागिगेल छल हमरा। बात त एकएक सही छलनि हुनकर। लगैछल हमरा नहि जानि कुन केहन ठमन चलि आयल छी जतके माटिमे मात्र दुखक नोरक जैर रहल होइ ? कहैत छै राति दिन सँग सँगे अबैत छै।अहिठमन त लागि रहल छलै सुरुज देब आबही बिसैर गेल रहथिन।अन्हरिया पसरल छलै। हमर आँखि चारुकात चकुवा रहल छल। कतौ कुनो कोन पर रौदक छापो छकि कि नहि ? बडी मुस्किल स बडी देरक बात एक दु जगह जाक आँखि रुकल जत लागल जेना एेना स सुरजक इजोर यम्हर चलि आयल होइ।
नयन नोरायल त छलै मुदा ओहिमे प्रशन्ता छलै।बच्चाके जेठजन आशीर्वाद दय रहल छलखिन जे सफल भक आयब। मोन लगाक मेहनत करब। आबिक फेउर अपने गामठामके सेवा करब।जेहने मोन स जारहल छी ओहने बनोने रहब। कतौ पाहुन बनि रहके नहि सोचब। केहनो होउक ? अपना जन्मायल धरतीके परित्याग करब उचित नहि होइत छै। अपन कहैत ठोर सटि जाइत छै त आन कहैत ठोर अलग भजाति छै। हमर कहक मतलब बुझि रहल छी ने ? जहिना आहि बिदा कय रहल छी तहिना काल्हि उमंगके साथ दौरैत अँहासभके लेब आबि।
छोट सभ खुशी छलै जे हमरा सभके उच्च शिक्षाके लेल विदेश नहि जाय परत।पढिक एथिन ओ सभ त अहिठाम ओहिके लागू कय देथिन।दिदीभैया सभ जाक हमरा सभके आनठमक इनारक पानि नहि पिब परत । गृह त्याग नहि करपरत। अपन सब पावनितिहार मनब पायब । ओहो अपनाके सँग !
कनिक राहत हमरा भेटैय। मनेमन हम परमात्माके गोहरबै छियनि जे हे प्रभु हिनकर सभहक विश्वास बनल रहैन।बच्चा सभ लौट अपन गाम आबि अपन गामठामके सेवा करै।
हाथक घरीमे समय देखैछी त हमरो हवाईजहाजके उडके टाइम होब लागल छल।जाय परलै सोचि आगु बढैत छि त हँसीक आवाज सुनैत छी।हँसी अहिठाम ! हमर कान ठीक त अछि ने ? कि अकरो किछुके नसा त नहि चढि गेलैय ? हम घुरिक तकैछी त बुझै छी जे हमर कान सही सलामत अछि। सभहक मुह पर खुशी पसरल छलै। विदेश भ्रमणमे जारहल छलखिन। टुरिष्ट भिसा सभवाला छलखिन। हुनकर सभक खुशीमे हम चाहितोमे नहि सामिल होब पाबिरहल छलौ । नसीब अपन अपन। केउ पैसा घुमघाममे उडा रहल छलै विदेश जाक त केउ ओहि पैसा लेल देश स दुर होबक लेल मजबुर छलै।
मोनमे उवाह सबरंगक दृश्य फेराफेरि आबि घुमिरहल छल। समझमे नहि आबि रहल छल एना किया भरहल छै ? पहिने लगैत छल धनेके लोभेटा आदमी विदेश पलायन भयरहल छै। मुदा आइ बुझबामे आबिरहल छल जे हम कतेक सही छलौ ? मिडियो त सरकारेके छै ने ? जे प्रसारण कय देलक स्याह लोक जनलक।ओकरो त अपन जेब भरबाक छै ? अहिठाम ककरा मतलब ककरा स ? सभ अपना अपना लाय बेहाल। अकर जिम्मेवार के त ? किछु आदमी अपनो त बहुत सरकार ।जे आँखि मुनि कानमे तेल धय सुतल छै।ओकरा किया रहतै फिकिर ? रेमिट्यान्स त चलिए अबैछै ने !
कहिया तकि निर्दोष जनताके लुटैत रहतै?
अहि स निक त बरु डाकु होइत छै जे लुटैत छै घडी , मोबाइल , बैग , सोनाचानी , पैसा त लोक ओकरा गुनहगार मानैत छै। दस रंगक गारि बात दिनेदेखारे दति छै। ओ लुटैत त छै मुदा घर स बिहिन नहि कयदति छै। परिवार एके ठाम रहैत छै। परिवार एकठाम रहला स एकटा आपसी बल बनल रहैत छै।मुदा इ राजनीतिक महालुटेरा सभ त भविष्य , शिक्षा , स्वास्थ्य आर रोजगार एनाक महालुट कयरहल छै जे केउ आरोपो नहि लगा सकैत छै । लोकके आँखिमे छाउर झोकिक रखने छै । केउ किछु कहियो नहि सकैछै सब जनितोमे जे सबटा कायलधायल अकरे सभके छै।
हम अपन उडान लाय पलेन लग पँहुचति छी। हमहु जा अपन सिट पर बैसति छी।सोचाय लागल जहिना ई पलेन आब उपर मुहे उडतै तहिना कहिया देशो उपर मुहक उडान लेतै ? कहिया अहि देशक बासी मौलिक जरुरत रोटी , लत्ता आ बासक समस्या स दुर भजेतै ? दिन खेलौ त राति लाय आर राति खेलौ त दिनक चिन्ता स दुर हेतै ? अपने भुखे रहि कहिया तकि परिवारलाय थारी कोना भरुमे लागल रह परतै ? अहि देशमे कहिया ओहन केउ जनमतै जे सभक पीडा हरि लेतै ? जेना जानकीजी के अवतरण होइतै फाटल खेतक दरारि जल पिब जुराय लगलै। जगियौ हे भगवान बड अनर्थ भगेलै आब ? कहिया तकि रहबै एनाक आँखि मुनने ?
पलेन धरती के छोरि गगनमे विचर लागल छलै।हम अपनाके हावामे उडियाति पबितो आइ धरतीए स अपनाके जोरि रखने छलौ।आन दिन हावामे उड काल गुमान स भरल रहबाली हमरा आइ धरती अपन परान लागि रहल छल।
लेखक – सुधा मिश्र














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