मिथिला जतक राजा छला जनक।जनक ओ राजा छला जे एक आत्मज्ञानी छला।सत्यके प्राप्त व्यक्ति छला।एक महान संत।आजुक संत सभहक प्रेरणाक स्रोत ।संत मतलब जिनकर भितर मोहमायाके भगेल होय अंत।जिनका नहि ओझरा सके लोभलालच। इह मायावी दुनियाँ। एक महलमे रहितो महल स दुर। किछु भेटरहल तैयो ठीक।नहियो भेटला पर ठीक।सबचिजके लेल एकही सम्भाव।हर चिज विशेष ।हर चिज अद्भुत ।हरचिजलेल आदर।माने जिनकर हृदय करुणा स भरल होय।मन गंगा जा पवित्र होय।जिनकर उपस्थिति स चारुकात शान्ति पसैरजाइ।सिनेहक सुगंध उडियाजाइ।धदकति मन शितल भजाइ।
हुनका विदेह सेहो कहल जाइत छलनि।किया कि ओ इह पंचभूत देह स उपर उठिगेल छलखिन।अपन अस्तित्वके जाइन गेल छलखिन।ओ एक आत्मबोध महापुरुष छलखिन। चराचरके सिखागेलखिन जे एक राजा राजमहलमे रहितो पँहुचल पुरुष भसकैछथि।परमज्ञानी भसकैछथि।वनेमे जयबाक कुनो जरुरत नहि छकि।वस्त्र त्यागे नहि अपितु राज पहिरनमे रहितो लोक भगवत प्राप्त कयसकैत अछि।मोक्ष प्राप्त कयसकैत अछि।
मिथिला ओ नगरी छल जत पति द्वारा अपहेलित पत्नीक बच्चाके राजभवनमे सम्मान देल गेल छल।इह बात दोसर छकि जे बादमे ओहि पिडितके न्याय भेटलनि।मिथिला जाहि भवनमे शास्त्रार्थमे महिलाके ठाँटबाँट रहैत छलै।माने ओ नगरी, जत आइमाई सभ सेहो शास्त्रके जनैत छलखिन।ओ नगरी जतक आइमाई सभ सेहो विदुषी छलखिन।
मिथिला ओ नगरी छल जतक सबकिछु अद्वितीय छलै।सबकिछु बेजोड ।ओकर पार पायब मुस्किले नहि एकतरहे असंभव कह परतै।ओहन नगरी जे ओहि स पहिने सेहो नहि छलै नहि होबही पेतै।जाहिठमनक हरचिजके अपन खास पहिचान छलै।अपन खास मान , अपन खास सम्मान छलै।जाहिठाम जमायके भगवानक दर्जा देल जाइत छै।मुदा सुवागत गाइर पढि सेहो कायल जाइतछै।
मिथिलाबासीक लेल गर्वक बात अछि जे मिथिलाक हराय लागल चिज सब फेउर पुरनि जाक पसरि रहल अछि।दुभि जाक चतरि रहल अछि।आश करी जे दिन प्रतिदिन अहिमे आउर प्रगति होय।अकर हरचिज चाहे कला होइ, चाहे खानपान होइ, चाहे गीतनाद होइ सबमे तरक्की होइत जाइ।मिथिलाक भाषा , मिथिलाक संस्कृति , मिथिलाक संस्कार , मिथिलाक पहिरन , मिथिलाक नृत्य , मिथिलाक डहकन सबकिछु आगामी दिनमे सभजनके अपन सिनेहक डोर स बन्हैत आगु निरन्तर बढै।
जमाय – समैधके भोजनके विशेष ध्यान राखल जाइत छै मिथिलामे।बडका थारीके चारुकात कटोरीमे सचार परोसल जाइत छै।
तरुवा भरुवा वर बरी
लटपट डालना सँगमे पुरी
तिलकोर परोर कबकब ओल
अदौरी दनौरी सक्रौरीक डोल
गरै गरचुनि रहु बुआरी
गेन्हारी बथुवा केराउ खेसारी
चारुकात कटोरी बीचमे थारी
देखिते लागे पहिने निहारी
घी स शुरु दही स अन्त
परसायत डहकन सेहो कन्त
विश्वप्रसिद्ध नेशनल जियोग्राफिक म्यागजिन सँ नेपालक सेफ सन्तोष साहद्वारा परोसल गेल ‘मिथिला थाली’ ( मिथिला थारी ) के दक्षिण एसियाक उत्कृष्ट परिकारके रूपमे मान्यता देल गेल अछि। नेपालक भोजनके अन्तर्राष्ट्रिय स्तरमे चिनबति आयल सेफ सन्तोषक परिकार सबमे मिथिला थारी अखन विश्वभरि चर्चामे रहल रिपोर्टमे उल्लेख कायल गेल अछि।
म्यागजिनके अनुसार ‘मिथिला थारी’मे स्थानीय सामग्री, घरक स्वाद, परम्परागत मिथिलाक पकबबाला शैली आ आधुनिक प्रस्तुतीकरणके अद्भुत संयोजन भेलाक कारण ग्राहक सभके मन जितमे सफल भेल अछि। जनकपुरक परम्परा, संस्कृति आ भोजनक विशेष मान रहल अहि परिकारके अन्तर्राष्ट्रिय स्तरमे प्रस्तुत करबमे सेफ सन्तोषक महत्वपूर्ण योगदान रहल कहलगेल अछि।
बहुत बहुत बधाई छनि सेफ सन्तोष साहके।मिथिलाबासीक लेल इह गर्वक बात अछि जे हुनक चलते आइ मिथिलाक भोजनक परिकार अन्तर्राष्ट्रिय जगत पर सेहो अपन धुम मचब पँहुचगेल अछि।
मिथिला थारी जनकपुर स जहिना अखन अपन नामदाम काठमाण्डुमे सेहो जमा लेने अछि तहिना हर प्रदेश हर क्षेत्रमे भविष्यमे पसरैत जाय तकर काममा ।
सेफ सन्तोष ‘मिथिला थाली बाइ सन्तोष शाह’ नाम स झम्सिखेल, नक्साल आ गौशालामे शाखा सञ्चालन केनेछथि । जनकपुर फिस हाउसमार्फत मिथिलाक प्रसिद्ध माछक परिकारके व्यावसायिक रूपमे विस्तार कयरहल सेफ सन्तोष दोसरो सहर सबमे सेहो शाखा संचालनके सोच रखने छथि। बहुत खुशीक बात अछि जे काठमाण्डुमे रहनिहार सभ जनकपुरक सुआदके भरिपूर्ण आनन्द उठा रहल छथि।
सुधा मिश्र।
















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