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मैथिली कथा – कोनाक कटबै ओ दस दिन ?

सजिलो पोस्ट सजिलो पोस्ट
भदौ २८, २०८१, ७:५३ मध्यान्ह
मैथिली कथा – कोनाक कटबै ओ दस दिन ?

हम लाइब्रेरीमे धायल अखबारक पन्ना सब एक एक कय पल्टा रहल छलौ।कतौ किछु देरक आँखिक देखबके बाद फेउर पल्टाब लगैत छलौ। जे खोजिरहल छलौ से हमरा कतौ नहि भेटरहल छल।

ओहिठाम रहल एक एक अखबारके आगा स पाछा पलटा देलोके बाद मन निराशे रहिगेल छल। सँगही बैसल एक आदमी वृद्धे कह परतै पैसठ सत्तरके करीब रहल हेथिन से हमर बेचैनीके गर कय रहल छलखिन।

` कि भेल वउवा ? किछु परेशान लागि रहल छी ?´

हम हुनका दिस ताकि , ` जी हमरा कहि रहल ?´कहि अपना दिस आँगुर स ईशारा करैत छी।

` हँ ! हँ ! अहिके कहिरहल छी।कि तहन स अखबारमे ताकिरहल छी ? लगैय जेना जे अँहा ताकिरहल छलौ से नहि भेटल।´

` जी ! स्याह कह परलै ।´

`हम तखन स अहिके देख रहल। कतेक स्वच्छ आर कोमल अँहाक आँखि आर नाक अछि।´

हमरा हुनकर कहल बात सोच पर मजबुर कय देलक जे आहितकि आँखिके बारेमे स्वच्छ आर कोमल कहैत त सुनल छल मुदा नाक कहिया स घुसिया गेलै? ठरगर नाक , टुसि परल नाक , पसरल नाक, चेपटल नाक सब त सुनल छल मुदा नाक कहिया स स्वच्छ आर कोमल होब लगैय ? ईह आदमी कुन चस्मा स हमरा देखिरहल ?

` जी हम नहि बुझलौ ! अपने कि कह चाहिरहल छी हमरा ? ´

` अँहा हृदयके बड कोमल आदमी छी।अँहामे करुणा भरल विवेक अछि। देखुत कतेक स्वच्छ आर सुन्दर आँखिनाक अछि। ´

`जी कहके त नहि चाहिँ। हमरा माफ कायल जेतै ।आँखिके बारेमे त बुझबामे अबैय मुदा नाकके बारेमे हम किछुवो नहि बुझलौ। अगर सहज ढंग स बतायल जेतै त हमरा उपर अपनेके कृपा रहत। ओहुना कनि हम किछुके खोजिमे छी। हमर मन कनि कमे स्थिर अछि कह परतै ।´

´ से हमरा बुझा गेल अछि। अँहाके खोज भगवान जलदी भेटाबत ! मनके बेटी स्थिर बनाक राखके होइछै । ईह कहाँ ककरो सुनलाय तैयार रहैत छै ? फेउर अकर वेग ! बाप रे बा ! दुनियाँमे सब स तीव्र ! हम एक ज्योतिष छी। ईह ज्योतिषक भाषा थिक।´

` जी अपने ज्योतिष ! तब त अपने हाथ देख सेहो जनैत हेबै ? ´

` हँ! हँ ! किएक नहि ? ´

हम संकुचाइत हिम्मत कय हुनकर लग भय अपन हाथ बढबति कहैत छी , ` जी कनि हमरो हाथ देखदेल जाय न।´

ओ हँस लगैत छथिन। हमर मन सुठुवा जाइत अछि। मनेमन कहैत छी बेकार कहलौ। हम अपन हाथ पाछु कयलति छी।

` हेतै अपन हाथ बढाउ । किया पाछु हटा लेलौ ?´ , कहैत ओ अपन हाथ हमरा दिस बढबति छथिन।

हम खुशी होइत , ` कुन हाथ , बामा कि दहिना? ´, पुछैत छियैन।

` बाम हाथ दिय।´

ओ हमर हाथ लय देख लगैत छथिन।हाथके उन्टा पुन्टाक आगुपाछु देखैत छथिन। रहि रहिक हमर तरहतिके अपन आँगुर स सोहराब लगैत छथिन। हमरा कनि नहि ठीक सन लाग लगैय।अपनाके समझा लति छी ईह कहि जे `मणिमा तु हु बड शंकालु हेबे। जे आदमी तोरा बेटी कहि सम्बोधन केलकौव से कोना तेहन किछु कय सकैत छै ? ´

ओ हमर हाथक रेखा देखि कय कहैत छथिन , ` सब किछु ठीके अछि। तेहन चिन्ताबाला कुनो बात नहि अछि ? ´

` जिन्दगी सहजे ढंग स आगु बढैत चलि जायत। स्वास्थ सेहो कुनो तेहन तकलीफ नहि बढायत ´ , कहि अपन दोसर हाथ स हमर बाहि छुवैत हमर पीठ सोहराब लगैत छथिन।

हमरा हुनकर ईह चालि नहि पसिन परैय।मन होइय उठिक चलिजाइ। हुनका दिस तकैत छी हुनकर आँखि हमर हाथक रेखा पर अटकल छलनि। मुह पर हलका मुस्कि छलनि मुदा दोसर हाथ अखनो हमर पीठे पर छलनि। हम पीठके सुकुचबति छी जे ओ कहुना अपन हाथ हटालेथ । तहिना होइत छै ओ अपन हाथ हटालति छथिन।

हमर तरहतिके दबबैत आगु कहैत छथिन , ` अँहाक विवाह लव मेरेज नहि देखारहल। वियाह माएबापक मर्जी स होयत। मुदा लडका साथी सेहो देखारहल अछि। ´

हम मनेमन कहैत छियै जे हिनका बुझाइ छनि हम कुमाइरे छी अखन धरि। हमर विवाह भेला त काय वरिष होब लागल ।जे होउक कहलखिन त ठीके बात। हमर विवाह मायबापक कायल विवाह छकि।रहलै लडका साथीक बात ! त सायद अहिलेल आब हमरा दोसरे जनम लेब परत। कहबी छकि ` फेउर फेउर नार बभुर तर जैहो ? ´

बडका जिनगीक सुवाद भेट गेल अछि।लडका साथी ! आब सायदे अहि जनममे ककरो उपर विश्वास भरोसा हायत। एक लडका जे सिथमे सिनुर दति छै । जकरा पर लडकी अपन सबकिछु तन मन धन निछावर कय दति छै। भगवानक दर्जा दति छै। जिनगीके ईहे लडका कहब चीज एहन एहन मोड नहि देखा देने अछि से लडकाक पहिल अक्षर ` ल ´ए सुनि रोआ रोआ कापि उठैय। एक हाथक दुरी कि बस चलेत लडका जाति स एक विगहाक दुरी बना मन रह चाहैत अछि।

भगवान जनथिन ईह आदमीक चरित्र केहन छलैन ? कखनो भलाद्मी बुझाइत छलथि त कखनो निचा गिरल मानुष। जे रहथुन ? हमरा आब माथमे घुमाबति रहला स कुन फेदा ? एक बटोही सँग बाट धरिके सम्बन्ध । किछु कहल बात सब त ठीके बुझायल। लोकके अपन अपन रायविचार छकि। हमरा कतौ कतौ ईह शास्त्र मान लाय मन तैयार भजाति अछि।

अहि स पहिने एकटा ज्योतिष सेहो किछु किछु अहिना अहिना कहने रहैथ। हुनकर कहल एकटा बात त पुराके पूरा सहीए घटल चलिगेल । जहिना ओ कहने रहथिन तोहर शुरुके जीवन जेतबे मानसम्मान स भरल छौ पाछुक जीवन सेहो ओतबे मान सम्मान स भरल रहतौ । मुदा बीचक जीवन बड कठिन रहतौ।इयाह बुझ कि छुछे पयरे धदकति आगि पर चल परतौ। तु केतबो किछु दोसरालेल कय देबही परिनाम विपरिते एतौ। बडका परीक्षाके घरी रहतौ। सबदिसक फाटक जेना बन्द सन लगतौ। लेकिन हाथक रेखा इहो देखारहल छौ जे तु ओ सब परिस्थितिमे हिम्मत जुटा आगु बढैत जेबही । हमरा इयाह भगवान भगवती स प्रार्थना अछि जे तोरा हर परिस्थितिमे अपनाके सम्हारके क्षमता देथुन। नहि घबरै हे। जखन सभ अपन हाथ छिपलति छै तखन ओकर हाथ पकर स्वयं उपरबाला अपने उतरि ओकरा लग निचा अबैत छथिन।

पत्ता नहि ओ प्रतिकुल समय चलिएरहल कि बिदा भगेल ? आब एकटा चीज त चलिआयल छल जे किया नहि केहनो विकट परिस्थिति रहौक ? हम सहज ढंग स आगु बढिसकैत छी। सब स खुशी अहिबातक लगैय जे पहिने जकरा प्रति मन उपराग उलहन स भरल रहैत छल तकरो प्रति आब कुनो उपराग नहि रहिगेल छल । हँ ईह सोर्हो आना सच छकि जे हम फेउर अपने कि अपन छाहियो नहि चाहैत छी ओत ओकरा लग पँहुचे।

सायद भाग्यके ईयाह सब मंजुर छलै । आब त हमरा अपन भाग्य पर सेहो नहि पित्त लहर‌‌ैय। ओकरा धन्यवाद दति छियकि जे तु हमरा धिपाक निखारि देले। तु हमरा भितर छुपल उर्जा स हमरा परिचित करबेले।आई हम जाहिठाम छी ओहिठाम कहाँ रहितौ ? तोरे कृपा दृष्टि छौ जे हम अहिठाम अपन मानसम्मान सँग छी।काल्हि नोर भरल बाट नहि सुझति छल त आई दीप जरैत बाट चँहुदिस लगैत अछि।

हँ ! सायद संघर्ष हमर जीवनमे सबदिनके लेल लिखाक आयल अछि । कहियो किछु त कहियो किछु ! आइ फेउर नोकरी लेल यम्हर स उम्हर बौवारहल छी।किया नहि किया मनके परेसान हम नहि पाबि रहल छलौ। बाहर स बेचैन अपनाके पबितोमे भितर कुनो बेचैनी नहि महसुुस भय रहल छल। सायद कुनो नीके ठाम हमर बाट जोहिरहल।

मोबाइलके टुनटुनाइत देखि आँखि स्क्रिन पर पँहुचति अछि। मन खुशी भजाइय देखि जे नोकरीए बालाके नम्बर छकि। सायद कतौ भेटगेल? हम हब दय फोन उठा कहैत छियै , ` हेलो! ´

उम्हर स आवाज अबैत छै , ` मणिमाजी ! बाजिरहल छी।´

` जी ! जी ! नमस्ते सर ! ´

` नमस्ते ! अँहा जबलेल एप्लाई केने छलौ ने? ´

` जी सर ! ´

` फ्री मे छी कि कतौ इनगेज भगेलौ ? ´

` अपने कहल ने जा कत ,केहन काज छै ?´

`अहिके एरिया स कनिक फटकि मे काज अछि ´कहि ओ हमरा सबटा विस्तार स कहैत छथिन। ओतके मेन आदमीके नम्बर दय हमरा भेटलाय कहैत छथिन । हुनकर कहल अनुसार हम ओत पँहुचति छी।भगवानक कृपा कह परतै ओहिदिन सबकिछ फाइनल भजाति छकि आर काल्हि स काज पर आबलेल कहैत अछि। हम खुशी स झुमैत घर आबिरहल छलौ कि एकाएक मनमे अबैय हम बाहर बाहर परेसान रहितो भितर मन स्थिर होबाक कारण बुझाइय इयाह छल।मन प्रफुल्लित छल जे बहुत दिनक बाद मन जोगक काज भेटल अछि।

हम देल गेल समय पर अफिस पँहुच जाइत छी। संस्थाके मेन आदमी म्याम रहितो मे हमरा सरके निर्देशनमे काज करबाके छल। हमरा सर स भेटायल गेल।सर हमरा अपना अफिसमे लक गेलैथ।फाइल दस्तावेज सब देखा काजक जानकारी देब लगलैथ। हुनकर आदत छलनि मुह पर ताकि कय बाजके। हम लज्कोकरि आँखि निचा कय सब सुनिरहल छलौ। माउगमेहर रहितै त कनि तकबो करितियै मर्दमानुसके के देखे ? ओहु मे हम!

बीच बीचमे पुछति छलखिन हमर कहब बुझिरहल छी ने ? त हम हुनका दिस तकैत छलियै त अपना दिस तकैत देखि फेउर आँखि झुकालति छलौ। बडी स्थिर स मधुर बोलीमे एनाक बुझारहल छलखिन जे दोसरो क्षेत्रके आदमी सहज ढंग स बुझि जैतै।आदमी ओहिना अहि पद पर नहि पँहुचल छलखिन ? दिमाग के त मानही परतैन! बीच बीचमे एनाक बात निकलबा लति छलखिन जाहि स ओहिना पत्ता चलिजेतै नव आगन्तुकके कतेक ज्ञान आर अनुभव छकि ? अहिना एकटा पुछल सवालमे हमर देल जबाब हुनका नीक लागि जाइत छनि।

` अहाँ त हमर मनक बात कहिदेलौ। बड खुशी लागल। हमरा ईयाह चाहैत छल ।” , कहि हाथ बढबति छथिन मिलब लाय।

हम हिचकिचा जाइत छी हाथ मिलबमे।फेउर मनमे आवाज अबैत अछि ` मणिमा बेसी काबिल नहि बन । काज करके छौ कि नहि ? ´

हम स्थिर स अपन हाथ बढादति छि। सर हमर हाथके पकर‌ै छथिन।पहिलबेर एक अजीब फिलिंग भेल छल। किछुदेरके लेल त हमरा अपन हाथक अस्तित्वही जेना बिसरागेल होय। बस सरक हाथक नरमी आर गरमी याद रहिगेल छल । हमर हाथ ओ एनाक पकरने छलखिन जेना हाथ नहि भय गुलाबक फुल होइ। अतेक ध्यान राखि जे कहु कनियो बेसी बल परि ओकर पत्ती नहि मोचरा जाइ ।

हाथ मिलब स डरायबाली हम आन ककरो सँग हाथ मिलबितै हाथके ओकर पंजा स बाहर निकालय लाय धडफरायल रहैत छलौ। मुदा आई हम किछुदेर त शुन्यमे पँहुच गेल छलौ। पँहुचनाइयो त स्वभाविक छलै । लोक सब एनाक ने हाथ दबाक हिलब लग‌ैत छल जे कखनो लगैत छल खुनक बहाव होय रुकिगेल त कखनो लगैत जेना हाथक हड्डी आब कचकि जायत । हम नहि जनैछी सर हमरा बारेमे कि अनुभव केलखिन। ओना हम निचे ताकिरहल छलियै जे बुझि पायल हेथिन से अधेखिच्चे रहिगेल हेतैन।

सबटा बुझादेलाके बाद कहैत छथिन , ` नीक लागल अँहा स भेटिक। इ बात त हमरा बुझमे चलि आयल अछि जे अँहाके कतौ तेहन कुनो दिक्कत नहि हायत। अँहा सब किछु बन्हिया स हेण्डल कलेबै।तेहन कुनो कखनो हमर जरुरत परत त बिना झिझक सोझे हमरा स भेट हमर अफिसमे अँहा आबि सकैत छी। ´

हमरा अपन अतीत याद परिजाइय। ईह सब बात बिसरा जाईत अछि। सर प्रति उमरल भाव सब भावविहिन भजाइत अछि। हम जाहिठाम ठार छलौ ओहिठाम जाक फेउर ठहरि जाइत छी। काजक सिलसिलामे सर सँग हमर अौपचारिक सम्पर्क बढैत चलिगेल छल मुदा बातचीत हमरा दिस स `जी हेतै जी हेतै ´मात्र रहैत छल।

कहियोकाल सरक सवालके जबाब सेहो हम अँधे मुह बाजिक दति छलियै। हमर मुहे देखिक आधा स बेसी बात सर बुझिजाइत छलखिन। अहि मामलामे अपनाके भाग्यमानीए हमरा मान परत जे कायदिन हमरा कहैत छलखिन , `अँहा खुलिक बजैत किएक नहि छी ? हम उपकरिक अगर नहि पुछि त सायद अँहा हर बात अपने भितर रखने रहिजेबै। हँ बेसी नहि बजतै ? लेकिन एकेबेर अतेक चुप्पी। ´ हम चुपचाप सरके बात सुनि सर दिस तकैत छलियै त अकर प्रतिक्रियामे सर किछु नहि कहैत छलखिन। कहलाय त सर हमरा कहैत छलखिन मुदा सबबात के सर ठामके ठामे छोरि बिसरि जाइत छलखिन।

` अँहा काज बड जलदी आर ढंग स करालैत छियै। ´ , आबि हमरा कहैत रहैत छलखिन। सरके अपन काज स खुश देखि हमरा बड नीक लगैत छल।कहियोकाल हमरा खुलिक बज‌‌‌ैत देखि सर बड खुश होइत छलखिन। हमरा तब कहितथिन , ` आहि लागल जेना अँहा बजबो कर‌‌ैत छियै।´

हमर छोटछोट बातक धियान रख‌‌ैत छलखिन। कहियो काल हमर आँखिके उदास पाबि सरो उदास भजाइत छलखिन।ओ दिन त कायो फेरा किछु नहि किछु बहाना बना हमरा लग चलि अबैत छलखिन।

हमरा त अपना ओहिदिन पत्ता चलल जे हम बदलि गेल छी। जहिया सर छुट्टी मे छलखिन।सर छुट्टीमे छथिन जानिएक हमर आँखि उदास भय उठल छल । हर चिज विरान लाग लागल छल। अपन मुह एनामे देख तकि नहि मोन केलक। कंठ स निचा भात नहि ससरि रहल छल। परसन लयक चाय पिब बाली हम ,आइ सिस्टर हमरा चाय आनिक दति पुछ‌ै छथिन , ` म्याम अस्वस्थ छी कि ? ´

केतबो केउ किछु कहिदो हमरा , हमरा किछु नहि फरक परैत छल। सरक एक कहब स हम एना झुमि उठैत छली जेना जारक कारी कारी बदरा बीच सुरुज निकैल जाइत होई। हम सरके संगतमे आबि अतेक बदलि गेल छलिए जे एकदिन सरके कहल बात , ` हमरा लेल त ईह खुशीक बात अछि जे हमरो केउ धियान रखैत अछि । ´ पर खुद अपना विश्वास नहि भयरहल छल।

आश्चर्य भयरहल छल जे हम कि छलियै आर कि बनि गेलियै ? हम मानु चाहे नहि मानु बात त सय प्रतिशत सही छलै। खुशी लागि रहल छल अपना पर। सरके कहल किछु बात हौक हम आँखिक मुनिक मान पँहुच जाइत छलियै। जे बात हम नहि करबै सोचने रह‌ै छलियै ओहो बात सर आबिक हमरा करलाय कहैत छलखिन त खुशी खुशी कर पँहुच जाइत छलियै सोचि जे सर कहलखिन त जरुरी बात हेतै।हमरा पत्ते नहि चलल छल कखन कहिया हम अपनो स बेसी सर पर भरोसा कर लागल छलियै।

अहि संस्थामे हमरो एला लगभग एक वरिष होब लागल छल। लगैतछल जेना भल ही किछु दिन भेल होय।संस्थाके सेहो वरिष दिनक मुल्यांकन छलै। संस्था कि प्रगति केलकै से संस्था जानै। हमरा लेल त ईह साल रुपान्तरणके साल रहल।अहिसालमे मणिमा , मणिमा नहि रहि मणिमे रुपान्तर भगेल छलै। खाली जे गागर ढनढनाइत छलै से ककरो संगतमे आबि प्रेमभाव स भरिगेल छलै। आदरभाव ओहि गागर स झहैर रहल छलै।

हम मनेमन कहैत छियै , ` हम नहि जानि के उमरमे आगु छी ? बातविचार , बुद्धिविवेक ओहु स बढिक ककरो भावक बाट पर चल सिखादेब ओहिमे हम, सर अपने लग किछु नहि छि। हमर प्रणाम स्वीकार करी ।´

हमर दुनु हाथ सरके मनेमन चरण स्पर्श करैय। संस्था करिबन दस दिनक छुट्टीके आइ घोषणा केने छलै। अतेक दिनक छुट्टी सुनिते हमरा कुहेसा फाट लागल छल जे आब ईह दस दिन हम सरके दर्शन स बंचित भयजेबै। एहने एहने बात सब सोचारहल छल कि अपना आगुमे सरके ठार पबै छियैन। हम बक्कर बक्कर सर दिस ताक लगैत छी।आँखिमे ओहिना हमर छटपटाहट घुमिरहल छल।देखैछी जे, जे हमरा पर बीत रहल छल उवाह सरो पर बीत रहल छलनि।

सर किछुनहि बाजि बाहर चलिजाइत छथिन। संस्था स बाहर जायकालमे दुनुगोटाके फेउर भेट भजाइय। ` बाइ म्याम ´ , सर कह‌ैत छथिन।हमरा मुह स किछु नहि निकलैय। हम सरके तकैत रहि जाइत छि । किछुदेरके बाद किछु आगु गेला पर सर फेउर घुरिक कहैत छथिन , ° बाइ म्याम ।´ हमरा नहि किछु बाजले होइय नहि हाथे हिलायल पार लगैत अछि। लगैत छल देहियामे किछु काबु नहि रहिगेल होय। सास रहितो ठटरि परान बिहिन भेल सन लाइग रहल छल ।हम बस जाइत हुनका देखैत रहिजाइत छि।

राति भगेल छलै। हम अपन ओछ्यान पर छलौह। हिया सँ आँखि धरि सर छलथि।रहि रहिक कुहेसा फाटि रहल छल । नोर स गेरुवा जुडशितलक पानि जा जुरारहल छल। आधा स बेसी राति बित गेल छलै। समय अपन रुप बदलि रहल छल मुदा हम एकही रुपमे छलौ। हाथ एकाएक मोबाइल पर पँहुचति अछि त देखैत छियै मोबाइलमे कहिरहल छलै `अँहाके ककरो याद बड सतारहल अछि त बुझु ओहो अँहाके तेतबे याद कयरहल अछि। हम नोरके पोछि नयनके मुनि करोट फेरैत छी। लगैत छल जेना हमर सर हमरे सँग छथि।

कथा लेखक- सुधा मिश्र

Tags: मैथिली कथा

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