” कि भेलौ मम्मी ? एना किया एकटकरे देखरहल छाय ? काजर ताजर किछु तेहन लेपाय त नहि गेल अछि कि?”
“काजर लेपायक थोडही हमर बेटीके सुन्दरताके हरण कय सकत।अहोभाग तँ ओहि काजरके जे तोहर आँखिमे सजि चम्किरहल।”, मम्मीके आँखि नोर सँ भरिजाइत छै।आगा किछु नहि बजैत छै।
हम मम्मीके नोर पोछैत, ” त फेउर ई नोर किया?” मम्मीके ओना देखि हमरो आँखि ओहि बाटपर चललाय आतुर भजाइय।
” डर लागिजाइय।फेउर कहु —- ।भरोसा नहि छल —-। अखनो लागिजाइत रहैय ई कहु हमर भ्रम त नहि?” मम्मी आगु किछु नहि बाजि हमरा देखलगैछै।हमरा बुझबमे देर नहि लगैय जे अकरे हर्षक नोर कहल जाइत छै।लगैत छलै ब्याकुल नयन जुरारहल होइ।
हम कनि नितराइत मम्मीके बाँहि तर हाथ घुसियबैत, ” देख बेटी तँ तोहर सामनेमे छौ। आब ईह बेटी सबदिन अहिना रहतौ।”
” भगवान करौ तोहर मुहमे अमृत बरसौ ।तोहर खुशीक मुदैया बहुत छौ।सबदिन किछु ने किछु पाउछ लागले जे रहैत छौ।”
“आब तोहर बेटी सबदिन अहिना रहतौ।ई तोहर बेटी तोरा कहिरहल ।बेटी उपर विश्वास छौ ने!”
मम्मी किछु नहि बाजि हमरा दिस ताकि `हँ ´मे माथ डोलबति छै।
” मम्मी आब तोरा हम कहियो उदास नहि होब देबौ।हम बुझिगेल छी जे हम कुनो मानव निर्मित चीज नहि जे हमर रिमोट अनकर हाथमे रहतै।हम परमात्माक सिर्जना छी हमर जीवनक रिमोट हमरेटाय हाथमे रहतै।चल जल्दी सँ हँसिक कह, जो जल्दी चाय बनाक लाय ।तोहर बापो नहि पिने छथुन।अखने कहथुन अतेककाल धरि कथिकयरहल?”
मम्मी हँस लगैत छै।मम्मीके हँसैत देखि हमरा बड नीक लगैत अछि।कनिदेर मायबेटी हँसिते रहिजाइत छी।
” अच्छा तु चाय बनो हम कहने अबैछी तोरादिया जे आयल छै।”
मम्मीके कि भरोसा होउक? ईमानदारी पुर्वक जँ कहलजाय त हमरा अपने आश्चर्य लागिरहल जे हम कोना दलदलमे सँ उबार भगेलौ।जनैत छलियै अहिठाम दलदल छै रहनाइ ठीक नहि।मुदा के सुनैय?ओकरे पछोर धेने रहैत छलियै।
एकदिनक घटना याद परैत अखनो देह सिहरि जाइय।रोआ रोआ ठार भजाइत अछि।कोना हम अन्चिन्हल ठाम आर लोकबीच उटपटांग हरकति कय बैसल रहियै।लोक कि कहतै? से तकि बिसैर गेल रहियै कहि कि अहि एरियामे हमरा जनिते के अछि? हम ढुंगेधारामे बसि ब्यागस्याग लेनही भरिदेह कपरा पहिरने भबकति पानितर बैसगेल रहियै।
अखन ओहि दृश्यक झलक मात्र सँ करेजा काँपिउठैय।तहिया ईह जनितो दोसर दोसर धारा पर नहाति जनानी सभ हमरे देखरहल अछि।हमरा दिया कि सोचत ? सभ हमरा पागल कहत? हमरा किछु नहि फरक परल रहे।हम करिबन आँध घण्टा जोग पानिक भभका तर ओहिना बैसल रहिगेल रहियै।तकर बाद ओहिमे सँ निकैल हरतरह सँ देहक भिजल कपडामे स पानि गाडि सुखबके प्रयास कय रौदमे ठार भय सुखेने रहियै।सुखलाके बाद घरजायकाल अपनाके फेउर सकभर ओहने अवस्थामे आनिलेने रहियै।
हमरा अखनो नहि इह बात समझमे आबिरहल जे हमरा कि भजाइत छल? कुन भुत मनुसदेबा आबिक छुबिजाइत छल।मुदा अपन एरियामे पँहुच सँ पहिने एकोटा तेहन लक्षण नहि हाबी होबदति छलियै।सभहक नजरमे हमर अपन जे रेपुटेशन छल ओहिमे तिलो बमोजिम आँच नहि आबदति छलियै।हम कलेजेके लेल म्याम नहि टोलबैयाके सेहो म्याम छलियै।हमरा सँ पढेलाके बाद अपन बच्चामे सुधार देखि सभहक नजरमे हमर आउर मान बढिगेल छल।घर पँहुच सँ पहिने कहियो नहि बिसरैत छलियै बउवालेल किछु किनक धर।ओहु दिन धलैत छियै।
गेट ढकढकबितै बुझिजाइत छलै मम्मी आयल।दौरैत केबार खोल अबैत छलै।हम ब्याग ओकरा दति किचेनमे पँहुचैत छलियै जे जलपान खेने अछि कि नहि देख । ओ ब्याग खोलिक देखलगैत छलै जे आई मम्मी हमरालाय कि लक आयल अछि।होटकेस खालि देख मुहपर हँसि चलिअबैत छल आर हमर अनुमान सही रहैत छल जे एकदिस टि भी चलैत हेतै दोसरदिस ओ होमवर्क कयरहल हेतै।
“आइके सनेस केहन लागल?”
“नीक लागल मम्मी।अँहा कोनाक बुझिजाइत छियै हमरा ईह चाहैत छल?”
हम बउवाके कोरामे बैसबति, ” किया कि हम चाहैत छी हमर बउवा हरदम अहिना खुशी खुशी रहे।लजा लजाक हँसे।”
” जनैछी मम्मी! हमरा भोरमे बिसरागेल छल कहजे पेन्सिल छोटका भगेल अछि।अँहा त हमर मोनके बात बुझिजाइतछी । एकेबेर एक पैकेट पेन्सिल आर हमरा नीक लागबाला चकलेट ।थैक्यु थैक्यु थैक्यु मम्मी।, चकलेट अपनहु खाइत हमरोदति,” मम्मी एकटा बात, अँहाके सबदिन कोना याद रहैय?”
“कैला कि हम मम्मी छी।एकटा मायकेलेल सब सँ पैघ ओकर बच्चा होइत छै।सी लवस हर चाइल्ड मोर देन हर लाइफ।”
“मम्मी चाइल्डके सेहो वर्ल्ड बेस्ट पर्सन ओकर मदर होइछै।आइ लव यु मम्मी।,” कहैत गला सँ लागिजाइत छै।मायबेटाके साँझक टाइम अहिना अलारदुलारमे बितैत रहैत छै।
हम भानसभातमे लागिजाइत छी।हुनका आब सँ पहिने हम चाहैत रहैत छलौ बउवा सुतिरहे।बउवाके अहि सबदिनमा रमाकठोला सँ दुर राख चाहैत छलौ।भगवान भगवतीक कृपा छलनि जे हुनका स आब सँ पहिने ओ सुतिरहैत छलै त ओकरा स्कुल गेलाके बादे ओ उठैत छलखिन।जहिया कहियो एना नहि भेल त बिना कसुरक भागिदार ओ मासुम सेहो भजाइत छलै।बहसल हाथ ओकरो नहि छोरैछलै।
जहिना जहिना रातुक बयस चढैछलै तहिना तहिना हमर घबराहट बढल चलिजाइत रहैत छल।जहिया कनि सबेरे अबैत छलखिन तहिया किछु हदतक ठीक रहैत छलखिन।अबेर आबबाला दिन होसहबास नहि रहिजाइत छलनि।कहियोकाल त पेन्टके दुर्गन्धे गन्हाक अबैत छलखिन त कहियोकाल लेहरायल भुतलायल।कहियो कहियो हमरा अपने जायपरैत छल उठापुठाक लाब।हमरा स ओ ओतेक बडका देहदसाबाला !कोना सम्हारमे अबैत ?धनके घरपट्टी !नहि जाइन कोना बुझिजाइत छलखिन?हमरा बाहर निकलति देखि सँगे निकलि उठापुठाक आनिदति छलखिन।अखनो ओसभ नहि बिसराइत छथि। कहिक जाइत छलखिन बहिन तेहन किछुके जरुरत परत त बिना झिझक हमरा सभके उठायब।”
हमर आइख अखनो नोरा जाइय ।ओसभ याद परैछथि त।जिनकर किछु नहि लगैत छलियै तिनका सभके अतेक फिकिर छलनि जिनकर छलियै तिनका कुनो मतलबे नहि।प्रायः लोकक मुह सभ स सुनत रहैछियै घरपट्टी सभ बड टेर होइत छै।भाडादारके बड पेरै छै मुदा हमरा त लगैत छल जे जेना हमर सहोदर सँ बढिक रहैथ।
सच कहित हम आर बउवा आइ सही सलामत छी त हुनके सभहक देन छनि।निचा कनियो खर खरबरायल सुनि दौडक चलिअबैत छलखिन।आनघरि निचा कहियो भुलियोक हुल्की नहि मारबाला लोकसभ नाजुक घरिमे पैर पाछु नहि करैत छलखिन।नहि त कहियोकाल हुनका देहपर नहि जानि कुन राक्षस सवार भजाइत छलनि जे लगैत हमरा आब उगैत सुरुज देखहु पायब कि नहि!
आब त हमरा मरलाक बादक क्षण केहन होइत छै सेहो अनुभव भगेल छल।एकराति एनाक नहि कण्ठ जतने रहैत से हम सचमे परधाम पँहुच गेल रही।लोकके कहबै त विश्वास नहि करतै।हमर खिल्ली उडेतै।मुदा ईह सच छै।जखन फेउरजे हम अपनाके अहिलोकमे पेलौ किछुदेर अपनही आश्चर्यचकित रहिगेलौ। दौडक पहिने बउवाके तकलौ जे ओ कहाँ अछि ?सायद ओकरे पर माया लागि परमात्मा हमरा पुनः पठादेने रहथि।लोक जे कहौक?मुदा हमरा नजरमे भगवान अपने सभहक चारुकात छथिन।जखन सभ हाथ झिटकिलैतछै तखन ओ आबिक पकरिलति छथिन।
ईयाह सभके डरे हुनका आब सँ पहिने हम बउवाके सुताक सब काज ओरियालति रहैत छलौ।केबार खोलही काल सँ हुनकर हरकत सुरु भजाइत छलनि।ढकढक करितै खोल गेलहु तहुमे थप्पड ।अबेर भगेल त ” कथिलाय केबार खोलमे अबेर” कहिक थप्पड ।
“देखाइ नहि छौ ठार छी।जुत्ता खोलबे से नहि।”
हम चुपचाप जुत्ता खोललगितौ ।एकलात दति ,” चल हट उम्हर।हमर जुत्ता खोलैय।जेना हमरा एबे नहि करे।” हम साइड लागिजाइत छलौ।
जुत्ता अपना सँ खोल नहि भेल त ,” देखाइ नहि छौ।हमरा कनि बेसी पियागेल अछि से नहि खुजैय हमरा सँ।” पयर आगु बढबति ,” चल जल्दी खोल।नहि त अहि जुत्ता सँ चारि जुत्ता खेबै।तोहर काजे कुन छौ ?अखने जाक हमर जुत्ताके साबुन सँ झम्मा लक रगरि रगरिक धोक राख ।नहि त अखन कि भेलौव ? तब बुझियही।फेउर बाप बाप नहि करिहे।पिटकालमे आयउह कनिको किछु सुनिक केउ एलौ त बुझिजो कि दसा तोहर हेतौ?”
हम चुपचाप जुत्ता खोल लगैत छी।
केश धय घुमबति, ” अतेक काल सँ एकटा जुत्ता नहि खोलिसकल?”
“आह दुखाइय।छोरुन केश। ई कि करैछी।सबटा केश लगैय नोचागेल।”
” त हम कि करियो? खुजलौ जुत्ता ? आह जे केले त चुरकी धय नचेबौ”,कही
केश छोरिदति छथिन ।
“फिता खुजिगेल।पयर उठायब त नहि पयर स निकलत।”
” हम किया पयर उठाउ? तुही उठा तुही निकाल।”
हम पयरके उपरकर चाहैछी जाहि सँ जुत्ता निकालि सकी।
” हमर पयर सोहरबैय।चल हट”, कही पयरके झिटकै छथिन त हम उन्टे गुरिक जाइत छी।दुनु जुत्ता पयर सँ निकालि फेकैत ,” लेह।पाँच मिनटके अन्दर धोक साबुन सँ राख।”
हम जुुत्ता उठा खिच चलि जाइतछी।बाथरुममे खिचरहल रहैछी त घरमे हुनका हमर पानि आर स्ट्रेलाय हल्ला करैत देखि हम घरमे दौगैत छी।
बेड सँ सँगे सटल टेबल पर डेलीके रुटिन बमोजिम धायल पानिके बोतलके उठा हम कहैत छियै, ” इयाह त अछि धायल।”
” ए ह।स्ट्रेमे पानिके रखतै ? “
स्ट्रे उठाक देखबति,” पानि धायल अछि।”
” जेना हम आन्हर रही तहिना देखबैय।जुत्ता खिचेलौ? खिचक आबि हमर पयर
दबबिहे।” , बोलीमे कनि लचकता छलनि।हम हुनकर मनोभाव बुझिजाइत छियै।सबदिनमा रुटिनजे छलनि।
हम जुत्ता खिचक अबैत छी।टि .भीमे हिन्दी सिनेमा चलिरहल छलै।घर पूरा धुवेधुवा सँ भरल छलै।इयाह धुवाक गन्ध स पहिने बोकरिबोकरि भरबाली हम अखन आबि अहि धुवाक प्रसंसक बनिगेल छलि।हम रुमक दोसर बेडपर जाय सुतिरहैछी।हुनकर अपन फोनफान जे कहियो नहि बिसरायबला काज छलनि करैत छथिन।हमरा पहिने त देह जरिजाइत छल।कतेक दिन कहाकही सेहो भजाइत छल।मुदा पिटाइके सिबा किछु नहि हासिल भेल छल।ताय आब अहि सब सँ सकभर दुरे रहैत छलौ।
छाती फाइटजाइत छल ।टुक्री टुक्री भजाइत छल सुनिजे अन्कर बुढबच्चाके पुछति छलखिन, ” खेले? किछुक दिक्कत त नहि छौ ?मायके काहादुन बड पेरै छिही? पैसातैसा चाहिँ त चुपचाप हमरा फोन करिहे।मायके कहिक कथिलाय टेन्सन दति रहैत छिही।” काश अकर सय हिसमे सँ दुइयो हिस जे अपन बच्चा पर ध्यान रहितैन जे अबोध अखन छलै।
” है यम्हर आन ! पयर दबान।तखने कहने छलियौ सुनाइ नहि परल छलौ!”
हम अन्सुनलकय सुतले रहिजाइत छी।
” हइ आन तोरे कहैत छियौ।हमरा लग आबेन।”, आवाजमे कामुकता भरल छलनि।हमरा नहि अबैत देखि उठि हमरा लग आबि हमर हाथ पकरि तनैत, ” पितायल छे! नहि पितोन कनिक देर।हमर मोन केनादुन केनादुन होबलागल।चुपचाप हम जेना जेना कहैत छियौ तेना तेना कर।तोरो त मजा अबैत रहैत छौ। अबिते हमरा लगजे मुहपर लाली जे चढिजाईत छौ। बदनो के जेना किछु किछु होब लगैत छौ।देख कोना अखनो आँखि झुकल छौ।अतेक दिन वियाह भेलाके बादो उवाह कसक।सिखे केउ तोरा स।जखन तु फर्ममे अबैत छै त माय सपथ हमरा गजबके मज्जा आब लगैय।तोरो देखैछियौ मुग्ध रहैछे।”
सचमे हमर हाथ पकरब स हम पिघलिजाइत छलियै। हमरा दुख दर्द पीडा सब बिसराजाइत छल।बस हुनकर हाथक स्पर्श याद रहिजाइत छल।हुनकर पाछु पाछु कोबरक कनियाँजाक चलिदति छलौ मस्त मगन होबलाय।जेना हमहु अकरे बाट ताकिरहल होइ।रातिमे लगैत छल चान आबि शितलता बरसाजाइत छथि।
सायद अकरे बयस कहैत छै।बादमे चानक शितलता स एनाक नोचनीने उठलागल जेना जेठक कडगर रौद होउक।मोन होइत छल कनिदेर सँग बसिता।हमर लोचनमे झाकि किछु पढिता।गाल पर लटकल लट्टके कानमे घुसिया मोनो राखलाय पुछिदैता जे सबटा असगरे कर परैछौ।वउवा पापा पापा कहैत हमरा दिया कि सब बतियाइत रहैत छौ? कि खेलेह? अपन कलेजक ओही पैसा स पुगैछौ कि नहि? बउवा अखन ग्रोइंग स्टेजमे छै खानपिनके ध्यान रखैछिही कि नहि? किया अतेक दुब्बर छाय?वउवाके पढाइ केहन छौ? काय कक्षामे छै ओ? मोन तरसलके तरसले रहिजाइत छल भावनात्मक स्पर्शलाय।मायबेटा बाट चलितो किनको मायबाप सँग बच्चाके देखैत छलियै त आँखि उम्हरे एकटकरे ताक लगैत छल।
धिरे धिरे विश्वास सेहो नहि रहिगेल छल एहन कुनो दिन जिन्दगीमे एबो करत।आँखि आब स्वपन देखनाइ छोरिदेने छल।मोनके मनालेने छलौ ।एहने ,नयनमे नोर भरल हमर भाग्यमे अछि लिखल।आब त हँसी सपनोमे आब छोरिदेने छल ।हरदम भितर किछु बाहर किछु रुपलक जीव परिरहल छल।सायद अकरे नतिजा हेतै हम बुझिगेल छलौ जे हम डिप्रेसनमे छी।
कान पथरा गेल छल सुनैत सुनैत निकैल जो हमर घर स।कायबेर अहिलाय गालो रंगाजाइत छल।बान्हल केश नोचराजाइत छल।सबकिछु मायबच्चाके अपने जोरैतचिन्तैत छलौ।ह रुम भाडा नहि तिर परैतछल।कपडालत्ता समये पर खिचलखाचल आइरन कायल चाहै छलैन।ताय कहियो कैला साबुन चाहे सर्फेके प्याकेटे किनदेब।
तैयो थेथर जाक रहमे निक लगैत छल जे लोक कहत घरवाला सँगे रहैत छै।समाज दस रंगक खिस्साकहानी त नहि सुनायत।हरदम डरमे जिन्गी बितैत रहैत छल।अपना सँग किछु होइत छल तकर कुनो गम नहि रहैत छल।वउवा सँग भेल कुनो बात बरदास्त नहि होइत छल।सबकिछु करलाय हम ।थप्पड देबबाला ईह के? मोनमे अबितो एहन विचार प्रतिकार करके बदला वउवाके लग पराइत रहैत छलौ ओहि रुम स ओहि रुम।
अपना लागि रहल छल हम बहुत बिमार भय चुकल छी।डिप्रेशन चरम सिमा पर पँहुचल जारहल छल।डाक्टर लग गेलौ सही छल।हमर सबबात सुनलायके बाद कहैय छथि दवाइ स बेसी अहाँके लोकके जरुरत अछि।कखनो असगर नहि रहब करु।कतौ जाक मिलैत अछि त किछुदिन रहिजाउ ओत जत लगैय अहाँके ओकरो हमर फिकिर छै।
धोकराके मारि धोकरेमे सहब उचित लागल।कत जाउ? घर परिवारके हमरा बारेमे किनका नहि बुझल छलै? हमरा सभके घर सँ केतबो निकललाय कहलो पर नहि निकलति देखि हमरा सभके छोरिक अपने चलिगेलखिन।माथ पर लागल पहाड आबि टुइट परल।अहि महग फ्लायटमे रहक आँट नहि छल।छोटछिन कनि बजार सँ दुर सस्तामे खोजि किछु अपन किछु वउवाके कपडा एकटा ब्यागमे कसि बउवाके आँगुर पकडा बिदा भगेलौ।नयाँ रुम लग अबैत कथि पर सुतब बैसब कहि म्याट किनैत जाइत छी।
भानसकरलेल किछु नहि रहक कारण चुरा दही किन लबैत छी ।मायबेटा खाइत छी।धिरेधिरे काजक चिज सभ जोरैत चलिगेलौ।पत्तो नहि चलल जिन्दगी दोसर रुपमे परिवर्तित भगेल छल।एकटा जय भितर डर छल धिरे धिरे बिलाय लागल छल।दिनराति अपन जाक लागलागल छल।छक्क त हम तखन परिगेल रही जखन घरपट्टी आबि हमरा कहैय, ” कते सुन्दर प्रियगर तोहर सभके जीवन छौ।नयन जुराजाइय तोरा सभके देखि।मायके दुनियाँ बउवामे वउवाके मुहमे मम्मी सुनुन।मम्मी एना मम्मी ओना।नहि हरहर नहि खटखट।केते सुन्दर शान्त आर दुलार भरल जीवन।सबके सोचब स दुर छै? आई तोरा सभके देखकय लगैय जे जिन्गी जीव सबके बसके बात नहि छै ?बाहिरी चीज देखैछियौ त तेहन किछु नहि छौ।
मुदा गजबके बोन्डिंग मायबच्चामे।हँसीखुशी एहनजे भितर हँसीक मुल फुटल होय।तोरासब लग अबैछी त लगैय हमरो ठोरपर आबि हँसीखुशी बसिजाइत होय।”
हम जाक चाय बनब लगैत छी।मम्मी डेडी लग नहि हमरा लग आबि भानसघरमे बसिजाइत छै।
” अत चैलएलहीय?”
” हँ तोरा कहियो स्थिर भय देखहु नहि पबैत छी।”
” अच्छा, से बात।ले मोन भरिक देखले ।”, कहि हम मम्मीके आगुमे कुर्सी तानि रभसिक बैसजाइत छी।ठोरपर हमर हँसी पसरल छल।
” केहन बात बजैछै? मायके कहियो अपन बच्चाके देखिक मोन भरलैय? तुहुत एक माय छै।जनिते हेबे।”, मम्मीके आवाजमे ममत्व भरल छलै।
हमहु ओहिमे ओहोबोहो भयरहल छलौ।
” भगवान सेहो मुदैय बनिक तोरा पर लागिगेल छलखुन।नेनाके हमर कि सभ नहि भोग परल?”
” सुरुमे हमरो ईयाह लागल रहे।जनैछिही मम्मी एकटा बात।जखन केउ नहि आगुपाछु देखबलाय ठार रहैछै आर आदमी खसलगैत छै त भगवान आबि पकरिलति छथिन जेना आगुएमे ठार रहथिन।”
” ओ कहियो हमर सोझामे त परथ? हमहु आब ठोर सिबक रहबाला नहि छियै?”
“मम्मी फेउर उवाह बात।अँहाके त आब हुनका खुशी स आशीर्वाद देबाक चाहिँ जे जत छथि ओत नीक स रहियथि।धन्यवाद कहियौन हुनका।जाय ओ छोरिक गेलथ ताय बेटीके अहिरुपमे देख पाबिरहल छी।”
कथा लेखक-सुधा मिश्र
महोत्तरी (हाल काठमाडौ)















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